धीरे धीरे ओझल हुआ ...
काई लगा छज्जा ,
उसपे लटकती बेल...
दरवाज़े पे बौराए से झूलते
मालती के फूल
अलविदा में हाथ हिलाते
अम्मी हुमा और मकबूल
ओझल हुआ...
फिर आँखों से
घर का सुकून
फिर जा रहा हूँ परदेस
कमाने रोटी दो जून ...
अम्मी हुमा और मकबूल
ओझल हुआ...
फिर आँखों से
घर का सुकून
फिर जा रहा हूँ परदेस
कमाने रोटी दो जून ...

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